नोटबंदी को छलावा मानते हैं लोग   

देश के पांच राज्‍यों के चुनाव में भाजपा सर्जिकल स्‍ट्राइक और विकास के मुद्दे पर मतदाताओं को लुभाने का प्रयास करेगी, लेकिन नोटबंदी के रूप में केंद्र की भाजपा सरकार ने जो सर्जिकल स्‍ट्राइक देश के लोगों पर की है उसे लोग छलावा मानते हैं। नोटबंदी पर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का बयान देर से आया, लेकिन दुरुस्त आया है। राष्ट्रपति पद की मर्यादा और कूटनीति दोनों एक साथ निभाते हुए आखिरकार प्रणब मुखर्जी ने नोटबंदी पर कहा है कि इससे गरीबों की परेशानियां बढ़ी हैं। एक तरह से उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फैसले को नादानी करार देते उसके दुष्परिणामों से भी आगाह कर दिया है। प्रणब मुखर्जी लंबे वक्त तक वित्तमंत्री भी रहे हैं। इस नाते वे देश की अर्थव्यवस्था से अच्छी तरह वाकिफ हैं कि एक नकदी प्रधान अर्थव्यवस्था में कैशलेस तरीके एक अव्यावहारिक अवधारणा और एक व्यक्ति विशेष की सनक भर है। राष्ट्रपति के इस बयान पर अब पपेट्स (काल भक्त) के कमेंट्स आएंगे ही।…पर ध्यान दें देश में राष्ट्रपति का पद सर्वाधिक गरिमामयी है।

अरुण माहेश्‍वरी की फेसबुक वाल का संदर्भ लें तो नोटबंदी के छल का जवाब चाहिए ! टेलीविजन चैनलों से प्रसारित किया जा रहा यह तथ्य अगर सच है कि नोटबंदी के बाद 500 और 1000 रुपये के पुराने 97 प्रतिशत नोट बैंकों में वापस गए हैं तो कहना होगा, हमारे प्रधानमंत्री ने लगभग दो महीनों तक करोड़ों लोगों को बैंकों के सामने क़तारों में घंटों खड़े रखने, सवा सौ के क़रीब लोगों की मौत का कारण बनने, पूरी अर्थ-व्यवस्था को चौपट कर देने, लाखों लोगों की रोज़ी-रोटी छीन लेने का एक महाअपराध किया है। उन्होंने पूरे राष्ट्र को बरगलाया कि वे इसके ज़रिये काला धन के खिलाफ, भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान चला रहे थे। उल्टे,  दूसरे सभी तथ्य यह बता रहे हैं कि प्रधानमंत्री ने भारत के आम लोगों को कुछ बड़ी पेमेंट कंपनियों को अपनी ख़रीद में से कुछ कमीशन अदा करने के लिए ज़ोर-ज़बर्दस्ती मजबूर किया है। अब तो इसमें विदेशी कंपनियों का हाथ होने की बात भी कही जाने लगी है।

हम जानते हैं कि प्रधानमंत्री अपनी इस भारी भूल को कभी नहीं स्वीकारेंगे और न ही सताए गए लोगों से कभी माफ़ी माँगेंगे। वे न कभी संसद में इस विषय पर सवालों का जवाब देंगे,  न किसी संवाददाता सम्मेलन का सामना करेंगे। उनके पास अपार शक्ति और संपदा है। वे तमाम भ्रष्ट उपायों से जमा की गई भीड़ और ख़रीद लिए गए चैनलों से एकतरफ़ा भाषणबाज़ी का नाटक करते रहेंगे। अब ज्यादा समय नहीं है। प्रधानमंत्री को पूरे देश के साथ किए गए नोटबंदी के इस छल का जवाब देना ही होगा।

इलाहाबाद से दुर्गा कहते हैं, 15 लाख करोड़ तो कुल नोट थे। उसमें सब का सब जमा हो गया। अब अगर 5 लाख करोड़ नकली नोट बाहर हुए तो कुल जमा तो 10 लाख करोड़ हुआ जबकि शुरू के दो हफ्ते में ही 8 लाख करोड़ जमा हो गए थे और यह खुद आरबीआई का जाहिर किया आकड़ा है।

अजय कुमार कहते हैं, 1000,500 के नोट नहीं चलेंगे जबकि 500, 2000 के नए नोट चलाएंगे। इसके पीछे जनता को ये बताया जा रहा है कि काला धन वापस आएगा लेकिन हम आप को बता दें कि देश का 95% काला धन देश के रियल स्टेट, गोल्ड, डायमंड, विदेशी मुद्रा के रूप में विदेशों में ज़मा है। ये तो आने से रहा, अब बचता है 5% जो नकद है। अब ये जानना जरूरी हो जाता है कि ये सब किसका है तो बता दें कि ये वर्तमान मंत्रियों, पूर्व मंत्रियों, पूर्व नेता, वर्तमान नेता, अधिकारी एवं कर्मचारी एवं पूजीपतियो का है।
इसकी जानकारी सरकार को है कि किसके पास कालाधन है लेकिन वो कुछ नहीं करती क्‍योंकि वो स्वयं इसमें शामिल है। यही कालाधन नेताओं को चुनाव में दिया जाता है। एडीआर की रिपोर्ट के अनुसार 2014  के लोकसभा के चुनाव में कारपोरेट जगत ने भाजपा को 700 लाख करोड़ तो कांग्रेस को 600 लाख करोड़ रुपये दिए। ये आप समझ सकते हैं कि ये कैसा पैसा है। हम कहना चाहते हैं कि जब सुप्रीम कोर्ट में विदेशों में कालादन ज़मा करने वाले लोगों की सूची बंद लिफाफे में दी जाती है और नाम नहीं बताया जाता। आखिर ऐसा क्यों ? इन देश के गद्दारों को देश की जनता के सामने बेनकाब क्यों नहीं किया जा रहा है ? कहीं इसमें वर्तमान सरकार के मुखिया सहित बहुत से राष्ट्रवादी नेताओं के साथ- साथ पूर्व की सरकार में शामिल लोगों के नाम तो नहीं शामिल हैं ? हमारे कर्जदार किसानों के नाम तहसील जहां उपज़िला अधिकारी होते हैं, दीवारों पर बड़े-बड़े अक्षरों में नाम पता सहित लिख दिया जाता है। तो इन गद्दारों के नाम देश की जनता के समाने क्यों नहीं लाया जाता ?

नोटबंदी के तुगलकी फरमान से लाभ एवं हानि
1.इससे थोड़े समय के लिए नकली मुद्रा पर रोक लगेगी।
2. आने वाले समय में गोल्ड एवं डायमंड की कीमतें बढ़ेंगी।
3. हमारी मुद्रा की विश्वसनीयता कम हुई दुनिया में।
4. सारा पैसा नम्बर एक में हो जाएगा क्‍योंकि ये जो भ्रष्ट लोग हैं वे कृर्षि में आय दिखाकर अपना काम बना लेंगे, लेकिन सरकार इन्हीं आकड़ों को दिखाकर किसानों की आत्महत्या का मजाक उड़ाएगी।
5. इसी आधार पर खाद, बीज एवं अन्य कृषि से जुड़ी चीजें महंगी हो जाएंगी।
6. जनता का ध्यान बुनयादी सवालों से हटाने में थोड़े समय के लिए सरकार सफल होती दिख रही है।
7. मुख्य धारा की मीडिया सरकार की चाटुकारता में लगी है। ये नहीं बता रहे हैं कि आने वाले समय में ये 2000  के नोट की वजह से कुछ ही समय में फिर इससे विकराल समस्या उत्पन्न होगी।
8. काले धन की समस्या कम नहीं होगी, बढ़ेगी ही क्‍योंकि इस पर कोई कार्य ही नहीं किया गया।
9. स्विस बैंक या अन्य विदेशी बैकों में जिन लोगों का काला धन ज़मा था सुरक्षित कर दिया।
10. पनामा लीक्स के खुलासे के बाद भी काले धन के कुबेरों को भी सुरक्षित बचा लिया।
11. ये पूर्व सरकार की कार्बन कापी है क्‍योंकि इससे पहले ये कार्य 1978 में मोरार जी देसाई सरकार जिसमें आप भी शामिल थे कर चुकी है।
12.आप ने डूबते बैंको को बचा लिया।
13. देश में भुखमरी बढ़ गई, किसान, मजदूर, छोटे दुकानदार को मरने के लिए विवश किया गया।

नरेंद्र सिंह तोमर का मत है, जानते हुए भी हारने वाली लड़ाई लड़ना वाकई दिलेरी का काम हैं, लेकिन जानबूझ कर कुएं में कूद कर मौत से मोहब्‍बत का तमाशा करना एक अलग बात है। नोटों या मुद्रा के स्‍वरूप में बदलाव के मुद्दे पर विपक्षी दल कुछ ऐसा ही कर रहे हैं, यह उचित नहीं है।
कांग्रेस या भाजपा में ऊपर का लेवल कुछ और कहता व करता है, जबकि नीचे का लेवल कुछ और ही कहता व करता है। एकदम विरोधाभास और जमीन व आसमान के बीच का अंतर रहता है। अब कांग्रेस के पास न तो खोने को कुछ बचा है और न पाने को ही कुछ। हम केवल तमाशबीन हैं और अब केवल कफन बगैर दफन होते एक अतीत का अंत देख रहे हैं।

Advertisements

Published by

fourthpillarsite

A result oriented professional withnational exposure in print media industry Expertise in editing news & its devlopment. Proven track record of developing news, service standards and operational policies, planning & implementing effective control measures to reduce problems of the field. Expertise in designing & page making focus on news, high energy level and team spirit in the employees. Excellent written, communication, inter personal, liaison and problem solving skills with the ability to work in multi cultural environment.

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s