राष्‍ट्र के लिए जीने का ढोंग क्‍यों

श्रीकांत सिंह। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि गैरकानूनी काम करने वाली कंपनियों पर कडी कार्रवाई होगी। तीन लाख ऐसी कंपनियां हैं जो आर्थिक लेनदेन के मामले में शक के घेरे में हैं और एक लाख कंपनियों का पंजीकरण निरस्‍त कर दिया गया है। ऐसा फैसला राजनीतिक गुणा भाग करने वाले नहीं, राष्‍ट्र के लिए जीने वाले ही कर सकते हैं। मैं मोदी जी से यह पूछना चाहता हूं-आप अखबार मालिकों के मामले में कब राजनीतिक गुणा भाग लगाना बंद करेंगे। कुछ गिने चुने अखबार मालिक न केवल गैरकानूनी काम कर रहे हैं, मजीठिया अवमामनना मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्‍लंघन कर देश की सर्वोच्‍च अदालत का अपमान भी कर रहे हैं।

पिछले दिनों मैंने दैनिक जागरण के मुख्‍य महाप्रबंधक नीतेंद्र श्रीवास्‍तव से फोन पर मजीठिया वेतनमान लागू करने का आग्रह किया तो वह सरासर झूठ बोल गए और कहा कि दैनिक जागरण में मजीठिया वेतनमान पहले से लागू है। मतलब साफ है कि वे मजीठिया वेतनमान नहीं देना चाहते हैं, भले इस मामले को सुप्रीम कोर्ट ने आइने की तरह साफ कर दिया है।

मोदी जी, ये अखबार मालिक जिन लोगों के साथ अत्‍याचार कर रहे हैं, वे गरीब लोग ही हैं। आपकी परिभाषा में गरीब कौन है, यह समझ से परे है। अभी तक किसी अखबार मालिक के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। किसी अखबार का पंजीकरण भी निरस्‍त नहीं किया गया है। आप राष्‍ट्र के लिए जीने मरने की कसम खा चुके हैं तो सबसे पहले इन मुनाफाखोर अखबार मालिकों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कराएं, भले ही वे भाजपा और आपका गुणगान क्‍यों न करते हों।

आपकी नजर में यदि राष्‍ट्रवाद अपने विरोधियों को ठिकाने लगाना है तो अपने विरोधियों की कंपनियों को चुन चुन कर बर्बाद कर दीजिए और अखबार मालिकों के अत्‍याचार को फलने फूलने दीजिए। आप सरकार में हैं, सत्‍ता आपके हाथ में है। आप किसी को भी कुचल दें और किसी को भी बचा दें, इस पर फिलहाल आपका अख्तियार है। फिर आप राष्‍ट्र के लिए जीने का ढोंग क्‍यों रच रहे हैं।

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