सुप्रीम कोर्ट में मजीठिया वेजबोर्ड अवमानना मामले की सुनवाई पूरी, फैसला सुरक्षित

नई दिल्‍ली।

सुप्रीम कोर्ट में पिछले तीन वर्षों से चल रही मजीठिया वेजबोर्ड अवमानना मामले में सुनवाई बुधवार को पूरी हो गई और अदालत ने अपने फैसले को सुरक्षित रख लिया है। हालांकि कोर्ट ने फैसला सुनाने की तारीख अभी तय नहीं की है, लेकिन सुनवाई के मौके पर अदालत में उपस्थित अखबार कर्मचारियों के जोश और उत्‍साह से एक सकारात्‍मक संकेत जरूर मिल रहा है।

दोनों पक्षों, मीडिया संस्थानों और अखबारों के पत्रकार-गैरपत्रकार कर्मचारियों की तरफ से बहस सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना याचिकाओं पर जारी सुनवाई पूरी होने की घोषणा कर दी और कहा कि फैसले को सुरक्षित रख लिया गया है।

पत्रकारों-गैरपत्रकारों की ओर से केस की पैरवी कर रहे एडवोकेट कॉलिन गोंजाल्विश, उमेश शर्मा व परमानंद पाण्डे  एवं याचिकाकर्ताओं के अन्‍य वकीलों ने अदालत में दलील दी और कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी देश भर के ज्‍यादातर अखबार मालिक अपने पत्रकार-गैरपत्रकार कर्मचारियों को वेजबोर्ड के अनुरूप एरियर व वेतनमान नहीं दे रहे हैं। उलटे वेजबोर्ड के अनुसार वेतन की मांग करने वाले कर्मचारियों को टर्मिनेट, संस्पेंड और ट्रांसफर करके परेशान किया जा रहा है। वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन न करने वाले मीडिया संस्थानों के खिलाफ अवमानना कार्रवाई करने,  मजीठिया वेजबोर्ड की सिफारिशों को मीडिया संस्थानों में लागू करवाने और परेशान किए गए कर्मचारियों को राहत दिलाने की गुहार लगाई है।

मीडिया संस्थानों का पक्ष रखने वाले वकीलों ने मजीठिया वेजबोर्ड के प्रावधान 20जे की आड़ लेते हुए कोर्ट से कहा कि कर्मचारी स्वेच्छा से बेजबोर्ड के अनुसार वेतन न लेने की लिखित सहमति दे चुके हैं। मीडिया संस्थानों ने न तो कोई अवमानना की है और न ही कर्मचारियों पर दबाव बना कर उन्‍हें परेशान किया है।

दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद जस्टिस रंजन गोगई की अगुवाई वाली पीठ ने सुनवाई पूरी होने की घोषणा की और फैसला सुरक्षित रखने का आदेश दिया। सुनवाई के मौके पर देश भर से बड़ी संख्या में मीडियाकर्मी मौजूद रहे।

यह है मामला

देश भर के अखबारों में कार्यरत पत्रकारों और गैरपत्रकारों का वेतनमान तय करने के लिए 2008 में जस्टिस जेआर मजीठिया की अध्‍यक्षता में गठित मजीठिया वेजबोर्ड के प्रावधानों को अखबार मालिकों ने लागू नहीं किया और उलटे उसकी संवैधानिकता को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट चले गए जहां उन्‍हें बुरी तरह हारना पड़ा। 7 फरवरी 2014 को सुप्रीम कोर्ट का आदेश कर्मचारियों के पक्ष में आ गया। मगर अदालत के आदेश के बावजूद ज्‍यादातर अखबार मालिकों ने वेजबोर्ड को लागू नहीं किया और सुप्रीम कोर्ट के आदेश को दरकिनार कर अपने कर्मचारियों को परेशान करना शुरू कर दिया। अंतत: अखबार कर्मचारियों ने सुप्रीम कोर्ट में अदालत की अवमानना का मामला दायर कर दिया। अदालत की अवमानना मामले में पहला और प्रमुख मामला अवमानना वाद (सिविल) 411/2014 शोषण करने वालों के सिरमौर अखबार दैनिक जागरण के खिलाफ अभिषेक राजा एवं अन्‍य बनाम संजय गुप्‍ता दायर हुआ। उसके बाद तो सुप्रीम कोर्ट में अवमानना मामलों की भरमार लग गई और देश भर के करीब छह हजार अखबार कर्मचारियों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा दिया।

सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार पत्रकार व गैरपत्रकार कर्मियों को वेतनमान,  एरियर समेत अन्य वेतन परिलाभ जो लाखों रुपये में बनता है, देने के आदेश पहले ही दिए जा चुके हैं। लेकिन अखबार मालिक तमाम तिकड़मों के सहारे इस आदेश का पालन करने से बचते रहे। देश के नामी गिरामी अखबार समूह राजस्थान पत्रिका,  दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण,  अमर उजाला,  हिन्दुस्तान टाइम्स,  नवभारत टाइम्स,  पंजाब केसरी जैसे सैकड़ों अखबारों में वेजबोर्ड लागू नहीं किया गया है। मीडिया संस्थानों ने वेजबोर्ड देने से बचने के लिए मीडियाकर्मियों से जबरन हस्ताक्षर करवा लिए कि उन्हें मजीठिया वेजबोर्ड के तहत वेतन परिलाभ नहीं चाहिए। जिन कर्मचारियों ने उनकी बात नहीं मानी, उन्‍हें स्थानांतरित और बर्खास्‍त करके परेशान किया गया। इस कानूनी लड़ाई में देश भर के हजारों अखबार कर्मचारियों को अपनी नौकरी गंवानी पड़ी। उम्‍मीद है कि अब उन्‍हें जल्‍द ही राहत मिलेगी।

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